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“दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र”

20 जुलाई 2026 के छात्र प्रदर्शन की फ़ुटेज। आख़िरी बार अपडेट: 21 जुलाई 2026।

ये प्रदर्शन 6 जून 2026 को जंतर मंतर पर शुरू हुए थे। इनकी अगुवाई Cockroach Janta Party ने की — अभिजीत दीपके का शुरू किया हुआ एक व्यंग्यात्मक युवा आंदोलन — और साथ में कई छात्र संगठन थे। माँग थी शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा, क्योंकि NEET का पेपर बार-बार लीक हुआ और उसके बाद कई छात्रों ने आत्महत्या की। प्रदर्शन में शामिल ज़्यादातर लोग 16 से 20 साल के थे। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की और 18 जुलाई को उन्हें ज़बरन अस्पताल ले जाया गया।

20 जुलाई को तीस हज़ार से ज़्यादा लोग “संसद चलो” मार्च में संसद की ओर बढ़े। यह पन्ना उस मार्च पर हुई पुलिस कार्रवाई की फ़ुटेज इकट्ठा करता है। हर आइटम के साथ उसका मूल स्रोत है, और यह लेबल भी कि उसकी पुष्टि कितनी हुई है।

हटाए जाने से पहले इसकी कॉपी बना लीजिए। हर वीडियो कई जगह रखा गया है — पूरी सूची देखें। एक कॉपी अपने पास भी रख लीजिए।

लेबल का मतलब क्या है

पुष्ट
मुख्यधारा की रिपोर्टिंग से मेल खाता है, या एक ही घटना की कई अलग-अलग रिकॉर्डिंग एक बात कहती हैं।
वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित
फ़ुटेज असली है और उसमें जो दिख रहा है वह साफ़ है, लेकिन उसमें क्या हो रहा है — यह दावा सिर्फ़ एक ही स्रोत पर टिका है और उसकी अलग से पुष्टि नहीं हुई।
विवादित — और सबूत चाहिए
दावे पर मतभेद है, या उसमें किसी पर झूठ गढ़ने का आरोप है। दोहराने से पहले स्रोत ख़ुद पढ़ लीजिए।

“पुष्ट” के अलावा कोई लेबल होने का मतलब यह नहीं कि घटना हुई ही नहीं। मतलब सिर्फ़ इतना है कि हम अभी उसे तथ्य के तौर पर नहीं कह सकते, और हम यह छिपाना नहीं चाहते।

उसी दिन की मुख्यधारा रिपोर्टिंग

यह आर्काइव अकेला रिकॉर्ड नहीं है। इन संस्थानों ने मार्च पर अलग से रिपोर्टिंग की, और नीचे के कई आइटम इन्हीं के मुक़ाबले जाँचे गए हैं।

  1. 2026 Delhi Jantar Mantar protests

    आंदोलन की पृष्ठभूमि, समयरेखा और 20 जुलाई की घटनाएँ। इसमें लिखा है कि सुरक्षा बलों ने “प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज किया”, और प्रदर्शनकारियों की शिकायतें दर्ज हैं — पिटाई, बसों में हिरासत, और बिजली वाले बैरिकेड। शाम तक 65 मेडिको-लीगल केस दर्ज हुए।

  2. CJP संस्थापक हिरासत में, प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस

  3. संसद मार्च की लाइव कवरेज

दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसके 118 कर्मी घायल हुए। यह बात यहाँ जानबूझकर दर्ज की गई है। जिस आर्काइव में विवादित दिन का सिर्फ़ एक पक्ष हो, उसे ख़ारिज करना कहीं आसान होता है।

प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग

  1. पुष्ट

    भीड़ हटाने के लिए आंसू गैस

    क्लिप से लिया गया दृश्य: ऊपर से दिखती सड़क पर भीड़, जिसके ऊपर धुआँ फैला हुआ है।
    वीडियो चलाएँ
  2. पुष्ट

    बैठे हुए लोगों पर आंसू गैस

  3. पुष्ट

    प्रदर्शनकारियों पर और आंसू गैस

    वीडियो चलाएँ
  4. पुष्ट

    शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की पिटाई

    वीडियो चलाएँ
  5. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    बच्चों के समूह की तरफ़ तानी गई बंदूक

  6. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    कई पुलिसकर्मियों द्वारा एक लड़के की पिटाई

    उस दिन प्रदर्शनकारियों को बसों में हिरासत में लेना मुख्यधारा रिपोर्टिंग में दर्ज है — रिपोर्टिंग देखें। लेकिन यह ख़ास घटना और पुलिसकर्मियों की संख्या सिर्फ़ स्रोत के बयान पर टिकी है।

  7. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    पुलिस हिंसा की एक और घटना

    वीडियो चलाएँ
  8. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    सिर पर चोट लगे प्रदर्शनकारी

    दो अलग क्लिप में सिर से खून बहते हुए लोग दिखते हैं, जिनमें एक का बारिश के बीच बैरिकेड के पास इलाज हो रहा है। चोट कैसे लगी, यह किसी भी क्लिप में नहीं दिखता।

    वीडियो चलाएँ
    दूसरी क्लिप चलाएँ

    मूल पोस्ट अभी तक नहीं मिली। ऊपर Internet Archive पर कॉपी मौजूद है।

  9. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    कई पुलिसकर्मियों द्वारा एक प्रदर्शनकारी को ज़मीन पर दबाना

    वीडियो चलाएँ

    मूल पोस्ट अभी तक नहीं मिली। ऊपर Internet Archive पर कॉपी मौजूद है।

नाबालिगों पर हिंसा

  1. पुष्ट

    एक नाबालिग को थप्पड़ और लाठी से पिटाई

  2. पुष्ट

    एक नाबालिग का गला दबाया गया

महिलाओं पर हिंसा

  1. पुष्ट

    महिला प्रदर्शनकारियों की पिटाई

    क्लिप से लिया गया दृश्य: हेलमेट पहने अर्धसैनिक बल का जवान सड़क पर लाठी चलाते हुए, आसपास और जवान और प्रदर्शनकारी।
  2. पुष्ट

    तेज़ बारिश के बीच प्रदर्शनकारियों को बिजली का झटका

    इसकी अलग से पुष्टि होती है: उस दिन बिजली वाले बैरिकेड के इस्तेमाल का ज़िक्र मुख्यधारा रिपोर्टिंग में है। रिपोर्टिंग देखें

    वीडियो चलाएँ
  3. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    एक महिला प्रदर्शनकारी पर वार, जिसे स्रोत गुप्तांग पर किया गया वार बताता है

  4. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    पुलिसकर्मी, जिन्हें स्रोत महिलाओं से छेड़छाड़ करते और हँसते हुए बताता है

  5. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    एक युवती के कपड़े फाड़े गए, जिसे स्रोत पुलिस की कार्रवाई बताता है

    जिस व्यक्ति का वीडियो है, उनकी सहमति से प्रकाशित।

    वीडियो चलाएँ

    मूल पोस्ट अभी तक नहीं मिली। ऊपर Internet Archive पर कॉपी मौजूद है।

पहचान और जवाबदेही

  1. पुष्ट

    ड्यूटी पर बिना नेम टैग के अफ़सर

    क्लिप से लिया गया दृश्य: नीली वर्दी में अर्धसैनिक बल के जवान, साथ में ग़ायब नेम बैज के बारे में न्यूज़ कैप्शन।
  2. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    लाठियों में कीलें ठोके जाने की रिपोर्ट

    क्लिप से लिया गया दृश्य: पास से फ़िल्माए गए पुलिसकर्मी, साथ में लाठियों में कीलों के बारे में कैप्शन।
    वीडियो चलाएँ
  3. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    सादे कपड़ों में पुलिस के साथ काम करते लोग

    स्रोत इन्हें “प्राइवेट पुलिस” कहता है। इनकी पहचान और अधिकार तय नहीं हैं।

    क्लिप से लिया गया दृश्य: सड़क पर वर्दीधारी अफ़सर, साथ में पुलिस और प्राइवेट पुलिस की तुलना करता कैप्शन।
  4. विवादित — और सबूत चाहिए

    पुलिस द्वारा अपनी ही गाड़ियों को नुक़सान

    स्रोत इसे जानबूझकर की गई कार्रवाई बताता है, ताकि प्रदर्शनकारी हिंसक दिखें। यह नीयत का आरोप है और अकेली फ़ुटेज से इसे साबित नहीं किया जा सकता।

    क्लिप से लिया गया दृश्य: सड़क का दृश्य, पुलिस और खड़ी गाड़ियाँ।

पत्रकार और चिकित्सा

  1. पुष्ट

    पत्रकार हिरासत में

    क्लिप से लिया गया दृश्य: पुलिस की गाड़ी के अंदर बैठे कई लोग, साथ में एक पत्रकार का कैप्शन कि उन्हें प्रदर्शन कवर करने पर हिरासत में लिया गया।
  2. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    घायलों का इलाज कर रहे डॉक्टरों की पिटाई की रिपोर्ट

संचार और आवाजाही

  1. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    प्रदर्शन के पास तय स्टॉप पर बसों का न रुकना

  2. वीडियो मौजूद, स्रोत असत्यापित

    पोस्ट करने के बाद हटाई गई फ़ुटेज

  3. विवादित — और सबूत चाहिए

    संसद सत्र के दौरान सिग्नल जैमर का आरोप

    कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने यह बात उठाई और कहा कि सदस्यों को अंदर रोका गया। इसे आरोप के तौर पर दर्ज किया गया है।

  4. विवादित — और सबूत चाहिए

    प्रदर्शन पर पोस्ट करने के बाद पहुँच घटने की शिकायतें

    प्लेटफ़ॉर्म के बाहर से यह साबित करना बहुत मुश्किल है।

  5. विवादित — और सबूत चाहिए

    न्यूज़ चैनलों पर AI से बनी फ़ुटेज फैलाने का आरोप

    यह नामज़द चैनलों पर झूठ गढ़ने का आरोप है। यह गंभीर आरोप है और यहाँ इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

स्रोत का इंतज़ार

  1. अदालतों द्वारा राहत देने से इनकार

    अभी कोई स्रोत दर्ज नहीं है। स्रोत जुड़ने तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा।

  2. महिलाओं पर बार-बार हाथ उठाने के आरोपी अफ़सर

    अभी कोई स्रोत दर्ज नहीं है। स्रोत जुड़ने तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा।